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सोमवार, 16 जनवरी 2012

सबद...: तुम्हारे बालों की सबसे उलझी लट हूं / जितना खिंचूंगा उतना दुखूंगा

सबद...: तुम्हारे बालों की सबसे उलझी लट हूं / जितना खिंचूंगा उतना दुखूंगा
प्रस्तुतकर्ता गंगेश ठाकुर "गुंजन" पर 4:49 am कोई टिप्पणी नहीं:
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